paintedpostcards

A topnotch WordPress.com site

ICT कार्यशाला से जुड़ा अनुभव July 14, 2015

Filed under: Uncategorized — paintedpostcards @ 9:34 am

कोपासा द्वारा वडोदरा मे जुलाई २-४, २०१५ आयोजित ICT sharing and Documenting Workshop के माध्यम से Video Volunteers (VV) के कार्य को जानने का एक अवसर मिला. VV के प्रतिनिधियों ने अपने कार्य का व्याख्यान दिया एवं स्वास्थ्य से जुडी कुछ videos का प्रदर्शन किया. उसमे से यह जानकारी उभर कर आयी की VV अपने Community Correspondents के माध्यम से भारत के १८ राज्यों मैं कार्य कर रहे हैं. गुजरात मैं कार्यरत VV के Community Correspondent बिपिन सोलंकी ने अपना ११ साल का अनुभव साझा किया. बिपिन ने कहा की इस माध्यम से वे वंचित समुदाय के अधिकारों के हनन की बात को उजागर करते हैं. इस कार्यशाला में कोपासा से जुड़े ६ राज्यों के Community Practitioners ने ICT से जुड़े अनुभव साझा किये. इन अनुभवों से सामने आया की फोटोवौइस् के माध्यम से अधिकारों के हनन के लिए साक्ष्य का संचय किया जा सकता है एवं इसे पैरोकारी के लिए प्रयोग मैं लाया जा सकता है.

इस कार्यशाला मैं दो अलग माध्यम उभर कर आये, एक समुदाय आधारित निगरानी के लिए ICT का प्रयोग एवं दूसरा VV का अनुभव. इस कार्यशाला मैं फैसिलिटेटर के माध्यम से यह विचार भी साँझा हुआ की हमें community को romanticize नहीं करना है. समुदाय के सबसे निकट है Grassroots Practitioner, और CBM मे bottom up approach के लिए Grassroots Practitioner ही nodal point है.

मेरा पत्रकारिता का अनुभव है कि हम जब हम कोई मुद्दा/विषय लेते हैं,किसी स्टोरी या News के लिए,या तो वह need based होता है / need based in the sense that the topic is in currency or it depends upon the discretion of the editor, what topic needs to be done, or it is the prerogative of the journalist as to what s/he wants to chose depending upon her/his expertise or the grasp over the subject.

इन अनुभवों से कुछ विचार/प्रशन हैं- की VV के Videos के विषय का चयन समुदाय से चुने गए Community Correspondents कर रहे हैं, या समुदाय ने चिन्हित किया है, या वह स्क्रिप्टेड है/ एडिटर या अन्य द्वारा चुने गए हैं. क्योंकि VV का tie-up mainstream media के साथ भी है. Photovoice methodology के अनुसार समुदाय पर Focus है और समुदाय द्वारा ही मुद्दों का चयन किया जाता है.

दो अलग methodologies हैं, जिनसे अधिकारों के हनन का विषय उजागर हो रहा है, इनमे से कौन सी कारगर है यह मुद्दा नहीं है, कैसे दोनों का प्रयोग वंचित समुदाय के अधिकारों के लिए किया जा सकता है, और बेहतर तरीके से किया जा सकता है, यही देखना है, or whether the alignment of these two is possible?

सुरेखा!

Advertisements
 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s