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पुरुषों के व्यवहार व प्रवृति में आ रहे बदलाव को अभी और आगे ले जाने की आवश्यकता है l February 10, 2014

Filed under: Uncategorized — paintedpostcards @ 7:09 am

दिसम्बर, २०१३ में एक बार फिर से महाराष्ट्र जाने का अवसर मिला l इस बार की यात्रा सोलापुर जिले में रही, जहाँ समजदार जोरीदार परियोजना के दो विशेष कार्यक्रमों में भाग लिया l पहला कार्यक्रम था –ज़िला स्तर की ‘Dissemination Meeting Meeting’, जो दिनांक २६ दिसम्बर, २०१३ को सोलापुर (महाराष्ट्र) में सम्पन्न हुई l इस मीटिंग का आयोजन समजदार जोरीदार परियोजना की सहयोगी संस्थाओं ‘हालो मेडिकल फाउन्डेशन’ (सोलापुर) व ‘अस्तित्व ट्रस्ट’ (सांगोला) ने संयुक्त रूप से किया l  इस मीटिंग में सोलापुर ज़िले के उपायुक्त (नगर निगम),  अध्यक्ष (जिलापरिषद),  ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी, राज्य संयोजक (यु. एन. एफ. पी. ऐ . , महाराष्ट्र), उप-निर्देशक  (सी. एच. एस. जे.), स्थानीय संवाददाता, परियोजना से जुड़े कर्मचारी (स्थानीय, राज्य एवं दिल्ली) व परियोजना से जुड़े एनिमेटरों ने अपने परिवार सहित भाग लिया l मीटिंग के दौरान, परियोजना के अंतर्गत किये गये पिछले चार सालों के कार्यो, नतीजो व प्रभावों की जानकारी दी गई, दो एनिमेटरों ने परिवार सहित अपने बदलाव की कहानी बताई व सभी विशिष्ट अतिथियों ने अपने – अपने विचार व्यक्त किये l अगले दिन कई स्थानीय समाचर पत्रो ने इस मीटिंग में हुई चर्चा व परियोजना के विषय में समाचार प्रकाशित किया l

दूसरी गतिविधि थी – दो दिवसीय सालाना अधिवेशन, जो २७-२८ दिसम्बर, २०१३ को पंडरपुर, ज़िला सोलापुर (महाराष्ट्र) में हुआ l मेरे अबतक के अनुभवों में यह एक अनोखा अधिवेशन था, जिसमे ग्रामीण स्तर के स्वयंसेवकों (एनिमेटरों ) व समूह के सदस्यों को बड़ी उत्साह के साथ भाग लेते देखा l इस अधिवेशन का आयोजन समजदार जोरीदार परियोजना की सहयोगी संस्थाओं ‘अस्तित्व ट्रस्ट’ (सांगोला) व सी. एच. एस. जे. ने संयुक्त रूप से किया l आयोजकों ने भी स्वयंसेवकों व समूह के सदस्यों के उत्साह को बनाये रखने के लिए सभी संभव प्रयास करे l रहने व खाने को व्यवस्था तो अच्छी थी ही, सभी लोगों का आपसी व्यवहार भी अच्छा था l सभी विशिष्ट अतिथियों ने अपने – अपने विचार व्यक्त किये तो अपने परिवार के साथ आये एनिमेटरों की पत्नियों ने  उनके जीवन में आये बदलाव की कहानी बताईl

अधिवेशन के दौरान कई सतर हुए जिनमे विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ स्वयंसेवकों व समूह के सदस्यों को भी अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अवसर मिला l इसके लिए  विशिष्ट अतिथियों के व्याख्यान हुए तो स्वयंसेवकों व समूह के सदस्यों के विचार व्यक्त करने के लिए चित्र-कला व विषय आधारित समूह चर्चा का सहारा लिया गया l अधिवेशन में भाग ले रही स्वयंसेवकों की पत्नियों ने बदलाव की कहानी सुनाई l अधिवेशन के दौरान,  एक फिल्म ‘मैंस अगेंस्ट दा टाईड’ भी दिखाई गयी जिसमे समजदार जोरीदार परियोजना से जुड़े एक एनिमेटर के प्रयासों को भी दर्शाया गया है l दो दिन का  यह अधिवेशन इस विचार के साथ सम्पन्न हुआ कि पुरुषों के व्यवहार व प्रवृति में आ रहे बदलाव को अभी और आगे लेजाने की आवश्यकता है l  

 

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रविश अहमद

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