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सीधी पर्सिली रिट्रीट का सफ़र November 19, 2013

Filed under: Uncategorized — paintedpostcards @ 8:59 am
हमारी रिट्रीट कि प्लांनिग  होते होते बहुत वक्त हो गया था, कुछ ना कुछ  काम आ ही जाता था, और फिर प्लानिंग , प्लानिंग ही रह जाती थी ! अब हम लोग इसे  एक ऐसा सपना मान कर  देख रहे थे कि यह भविष्य मैं जरुर होगा ! वैसे तो तीन स्टाफ को छोड़कर बाकि सभ ही स्टाफ पुराने ही है लेकिन ये सब सिर्फ प्लानिंग के ही हिसेसधार है!
चलो देर ही सही सावेरा तो हुवा प्लानिंग अब सच्चाई मैं बदल गई, लेकिन अपनी परम्परगत तरीके से….
पहले कि रिट्रीट कि तरह एस रिट्रीट का भी अपना ही अनुभव है, जैसे हमे ट्रैन के लिए दो बजे निकलना था, लेकिन हम चार बजे निकले, हमे वंहा ग्यारा बजे तक पहुचना था, लेकिन सात बजे पहुचे !
सफ़र लम्बा था, लेकिन उसमे भी अलग मज़ा था, जैसे ट्रैन मैं हमारी सीट्स अपडेट हो गई हमे  2  AC कि सीट्स मिल गई , पहले  हुमने अड्वोकस्य कि पर लाभ नहीं हुवा, क्योंकि जो यात्री वंहा पर बेठे  थे, वे अलग -अलग जगह पर उतरने वाले थे , तो हमे अपनी सीट पर ही बैठना पड़ा ! लेकिन हम भी कंहा  माने वाले थे, रात को हमने बहुत  देर तक गाने गाते गए, फोटोग्राफ खिचे, और शुभी के साथ मस्ती भी कि !
सीधी पहुच कर हम सब का येही प्लान  था ,कि पहले चाय काफी पी जाए, फिर आगे  का प्लान किया जाए! सीधी  से पर्सिली का रास्ता लगभग 5 से 6 घंटे का था ! सफ़र लम्बा था लेकिन सफ़र मैं जो खेत- खलियान, जंगल, नदी -नाले आ रहे थे, उससे सफ़र लम्बा नहीं लग रहा था ! साथ ही साथ बीच- बीच मैं ढाबे पर  रुक कर चाय कॉफी पीने का भी अलग  ही मजा था !
वंहा पहच कर रास्ते कि थकन  तो उतरी ही साथ ही साथ एक नया अनुभव भी हुवा, वंहा पर जंहा पर हम ठहरे थे ,वंहा पर एक नदी थी और जंगल भी , पहुच कर बहुत अच्छा लगा !  एक ही रूम मैं हम 6 महिलाओ के सात एक पुरुष अथात शुभी था ! रात  को देर तक बाते करना, सरिता जी का बिलकुल मासूमियत कि तरह  हर चीज़ का जवाब देना, शुभी  का अनीता को नहीं छोड़ना , बहुत अलग मजा था , रात  को कब सोए कब उढे कुछ पता ही नहीं चला ! वंहा हम सुबह नदी की  सेर पर गए, मस्ती कि और फ़ोटो भी खिचवाई !
अभिजीत सर , सतीश जी, सरिता जी और प्रेमदास जी ने सेशन बहुत अच्छे  से तय किये थे, कि हम वंहा कुछ सीखे भी व साथ ही सच्चाई को देखे भी और साथ ही साथ खुले वातावरण का लुत्फ़ भी उठाए ! हम लोग फील्ड विजिट पर भी गए जंहा हमने वह Animator  के साथ साथ वंहा के लोगो और किशोरियो से भी बात  कि , वंहा  के लोगो मैं जागरुकता कि किरण के सात उनके अतिथि सत्कार से मुझे  बहुत आच्छा लगा |
वंहा पर सांस्कृतिक कार्यकर्म का भी आयोजन किया गया था, जिसमे सभी ने नृत्य  किया, और साथ  ही साथ वंहा के लोगो ने अपना पारम्परिक नृत्य दिखाया,  जो सबसे भिन्न था, क्योंकि उस नृत्य मैं उन्होंने ने अपनी  पम्परा को दिखाया था , जिसमे वो अनुरोध कर रहे थे जंगल को न काटने का , और जैसे जैसे वह एक चरण से दूसरे चरण मैं जा रहे थे,  उनकी नृत्य करने  कि ऊर्जा बदती  जा रही थी ! रात का खाना भी वही पर था, जो बिलकुल पारम्परिक था, पत्तल मैं खाना, दोनों मैं दाल, सब्जी , खीर , बस खा कर मजा ही आ गया !
बताने को तो बहुत कुछ है पर क्या -२ बताए और क्या छोड़ो नहीं समझ आ रहा है , क्योंकि वंहा का हर एक पल बहुत सुन्दर था  !
पर्सिली मैं ये सारा कार्यकर्म का चुनाव  अभिजीत सर का  था , और  उसको वंहा पर आयोजित सतीश जी, महेंद्र और ग्राम सुधार कि टीम ने किया , जिसके लिए हम सभी आभारी है !
by Tulsi Manimutthu
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