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अलग अलग लोगो से मिलने का मोका मुझे CHSJ में ही मिला है March 11, 2013

Filed under: Uncategorized — paintedpostcards @ 1:16 pm

CHSJ मैं काम करते हुए मुझे आज चार साल हो गए  है पता ही नहीं चला कब समय  बीत जाता

है ! नयी  नयी  जगह जाने का अवसर मुझे यही मिला है, इस बार मुझे मुम्बई जाने का अवसर मिला है ! Excitement से ज्यादा मुझे चिंता थी,  क्योंकि मुझे Admin Support के लिए जाना  था , इससे पहले भी मैं Chandigarh गई  थी! पर वंहा पर मेरे साथ प्रतिभा, जाया जी, राजेस थे, और वंहा पर हमारी Admin Support  VHAP कर रही थी ! और इस बार हमे  ही  Manage  करना था , Logistic भी Travel Relinquishment भी डर भी लग रहा था,क्या मैं यह कर पाऊँगी या नहीं ?

शुरू से  ही मेरा सफ़र interesting था, हुआ यूँ  की मैंने Advance नहीं लिया था, मैंने सौच की ATM से पैसे जाते वक्त निकल लुंगी , इस लिए छोड़ दिया , और जब निकालने गई तो पता चला की ATM मैं पैसे  नहीं है,दूसरा ATM मैं भीड़ बहुत हो रही थी, तो सौच की रेलवे स्टेशन मैं निकलूंगी , तो वंहा हम बिलकुल टाइम पैर पहुचे, वंहा भी नहीं निकल पाई ! मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं थे! मुझे ज्यादा Tension इसलिए भी थी की वंहा पर कैसे ऑटोया टैक्सी  वाले को पैसे दूंगी ! मेरी सीट जंहा  पर थी उस Cabin  मैं सिफ Men ही थे,  तो मैने किसी  से अपनी सीट बदली ! वंहा पर मैंने केबिन  के लोगो से गोरेगांव जाने का रास्ता पूछ लिया था,  और सरिता जी के साथ भी coordinate कर ही रही थी।

मुंबई बांद्रा स्टेशन मैं पहुचने के बाद मैंने ऑटो किया,  पहले  तो उसने कहा की उसे मालूम है,  बाद मैं वो पलट गया, फिर  लागतार सरिता जी के साथ coordinate से कम के कम एक  घंटे के बाद हम Pious Collage Complex  गोरेगांव पहुचे, पहले मुझे यह लग  रहा था की Mumbai मैं एसे  ही घूम लुंगी ! वंहा पहुचने के बाद   पता लगा की सामान  भी खुद ही उठान पड़ेगा, और यह भी पता लगा की वंहा पर kitchen  नहीं है चाय और कॉफी भी सुबह शाम ही मिलेगी

सरिता जी के साथ मैं चाय और कुछ  खाने के लिए बहार Udpi restorent  गई ! हम खा ही रहे थे रक्ष्या का फ़ोन आया की उसेभी Venue तक पहुचने मं मुश्किल हो रही है , तो उसे भी सरिता जी ने Guide किया उसे एक point बताया जिससे हम उससे मिल सके,  उन्हें लिया वापस venue पर पहुचे , वंहा पर अभिजित सर से मिली फिर उन्होने भी मेरे travel के बारे मैं पुछा ! सर भी कुछ चाय नाश्ता  खाना चाहते थे,  पर जब पता चला की Dinar  का टाइम 7.30 है उन्होने कहा की फिर Dinner ही करते है! वंहा पर एक और  group था! जिनका खाना लग गया था हमे लगा  की हमारा ही खाना है हम भी शुरू हो गए  , लेकिनजब उसे बताया की हमरा नहीं है, तो थोडा बुरा भी लगा , फिर मैंने ही Food provider  को कहा की जब खाना आ जाए तो बता दे ! एक खास बात थी वंहा पर वंहा के Service Provider  जिस  तरह Delhi मैं होते वैसे वंहा नहीं थे , वंहा खुद जा कर सब खुच करना पड रहा  था , उनका behavior  कूछ अच्छा नहीं था ,  उन्हें बोलते रहो वे अन  सुनी कर  रहे थे। थोडा सा मैं रुकी फिर उनके पास जा कर मैंने कहा की बस तुम ही हो जो हो,  मेरे हाथ मैं अब  कुछ नहीं है आप ही कहो की  क्या करना है , क्योंकि अगर आप हमारा साथ नहीं दोगे तो यंहा तीन दिन का Workshop  करना मुश्किल हो सकता है ,  आप का support होगा तो ही हम अपना Workshop  यंहा ठीक तरह से कर सकते है ,शायद उनको  समझ आ गया फिर उन्होंने मुझे  बहुत Support किया,  और सब कुछ आराम से हो गया !

वंहा पर सब कुछ Manage  करना मेरे लिए मुश्किल था, वंहा  पर आए participant के सपोर्ट  से आसन हुआ, जैसे वंहा मछार बहुत थे, kitchen नहीं था काफी लोगो को bed tea पीने की आदत थी, पर उन्हीने शिकायत नहीं की! Photocopy, printing सब बहार ही था ! सब कुछ  ठीक ठाक  हो गया, मजा बहुत आया काम करने मैं!

Learning बहुत रही जैसे सबसे पहले आप पर control, Soft behaviour, बहार जाने से पहले  अलग से एक Event की checklist बनाना जो तुम्हे Emergency मैं काम आए, और अपना First Aid Box लेना नहीं भूलना ! Venue पर हो सके तो कम से कम पूरा एक दिन पहले पहूचना  वंहा पर मेडिकल शोप से लेकर printing, photocopy, cybercafe के साथ मार्किट का पता लगाना !

अलग अलग लोगो से मिलने का मोका मुझे CHSJ  मैं ही मिला है और घूमने का भी!  मैने वंहा पर Marine Drive , Crawford Market, Juhu Chopati, Film City , अमिताब जी का बंग्लो, Linking  Road के साथ साथ Local Train मैं जाने  का अवसर भी मिला!

Mumbai Delhi से सेफ सिटी है, वंहा लडकियों के चेरे पर यंहा जैसे डर  नहीं है और बेझिझाक  आराम से यंहा वंहा आ जा सकते है !  थोड़ी  चमक कम है buildings मैं खाना का स्वाद थोड़ा गुजरती औ थोडा साउथ का है! बस एक येही रह गया की मैने वंहा पर Maharashtra का स्पेशल खाना नहीं खाया! हाँ एक बात और मैने India की चार मेट्रो सिटी मैं से तीन देख ली है अब सिर्फ चोथी सिटी kolkata देखना बाकि है, यह सपना भी जल्दी पूरा होगा इसी  के साथ नमस्कार सुहावना सफर !

By Tulsi Manimuthhu, in Mumbai for the COPASAH workshop during 20-22nd February 2013

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2 Responses to “अलग अलग लोगो से मिलने का मोका मुझे CHSJ में ही मिला है”

  1. Sarita Barpanda Says:

    It was a memorable experience for me too. Supporting participants in a place about which you are clueless about is challenging, but what made up for the challenges was the fact that you build relationship around you with the guest house staff, with the guard of the guest house, and even the photocopier guy; and Tulsi you were truly wonderful

  2. महेन्द्र कुमार Says:

    आप कि कामना पूरी हो यही हमारी दिली कामना है, जिंदाबाद!!


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