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सहयोग उत्सव यात्रा ! September 10, 2012

Filed under: Uncategorized — paintedpostcards @ 5:33 am
उत्सव शब्द से मुझे रेखा की फिल्म याद आती है, जो मुझे तब भी समझ नहीं आई थी, क्योंकि तब मैं बहुत छोटी थी, तो अब भी यही था की क्या होगा ! पहले इतना बताया गया था की सहयोग की History के बारे मै चर्चा होगी  और presantation होगा,  तो इतना ही लगा की official trip है  जाएंगे बैठेगे फिर आ जाएंगे !

लेकिन ट्रेन से ही सब कुछ अलग सा ही लग रहा था ट्रेन मैं सीट  के लिए advocacy करना पड़ा, क्योंकि हम सब की सीट अलग अलग थी और हम सब को एक साथ बेठना था !  मौज  मस्ती और भी बहुत  कुछ  किया !
कहानी तो तब शुरू हुए जब हम KATHGODHAM  पहुंचे  वंहा का समां बहुत हसीन था ! नजारा ऐसा था,  की नजर मानो  यह कह रही थी,  की क्या देखूं  क्या नहीं हम सब का  बुरा हाल था,  बस  हम लोग यही कह रहे थे की   अरे वो देखो अरे यह देखो हमे बस यह  गाना याद आ रहा था,  उन पहाड़ो को तुम देखो  एन नजरो को तुम देखो, यह हंसी  वादियाँ यह खुला आसमान , समझ मैं ही नहीं आ रहा था की कहा आ गए  हम !  मैं बहुत बहुत खुश थी हूँ,   झील झरनों, बादलों  पहाडियों को देख कर  मेरा मुंह  मेरी आंखे खुली की खुली रह गई थी,मैं आवक सी रह गई थी !
नौकुचिया ताल और नैनीताल अपने आप मैं ही एक अलग ही ……………..शब्द   नहीं आ रहे है, वो पहाड़ों के बीच मैं नदी का निकलना, झरने का बहाना,  झील से  घरों , पहाड़ों, झाड़ियाँ , बादलों , फूलों और पानी का बहाना देखना, अपने आप मैं ही एक अलग ही नजारा  था मनो यह सब हमे चिढ़ा रहे हो, अपने  आप मैं ही इतरा रहे हो,  आपनी खूबसूरती, सुन्दरता मैं इठला रहे  हो!  पहाड़ तो मनो बस अपनी उचाही से हमे यह कहना चाहता हो की मुझे  पहले कभी देखा है, वहां की ताजी हवा, वहा की सड़क, बिना ट्रैफिक  के हमे बहुत अच्छा लग रहा था!  फूलो का अपना अलग रंग, रूप और तांजगी  देखा कर मैं तो सब कुछ भूल गई !
एक तरफ यह खूबसूरती से भरा नजारा था तो दूसरी तरफ सहयोग का एक अपना इतिहास है जिसे सुन कर एक और एहसास हुवा की संघर्ष की एक अलग परिभाषा  भी है,  किस तरह  अपने सही मूल्यों के लिए, जन हित के लिए, जनों ( लोगों )  को लेकर चलना जितना मुश्किल है, उतना ही सरल भी यदि आप सही हो, तो एक न एक दिन सब आपके साथ होंगे और सब मिलकर उसको साबित भी करेंगे बस लगन, हिम्मत, जूनून और आपका धैर्य कम नहीं होना चाहिए!
खूबसूरती और संघर्ष भरे इतिहास से एक नहीं प्रेरणा जो मुझे  मिली वो ये की अगर आप सही हो,  मन ला कर काम करो उसे अच्छी तरह करो तो सब कुछ खुबसूरत भी  लगेगा और आप सफल भी जरुर होंगे!  ऐसी सुन्दरता  और हिम्मत से  अवगत करने  के लिए मैं हमेशा CHSJ   और SAHAYOG  की आभारी रहूंगी और मैं आज खुश हूँ की मै उनका हिस्सा हूँ !

तुलसी मनिमुथू

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